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Suhel Khan and Saifur Nadwi

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51 Adh-Dhāriyāt ٱلذَّارِيَات

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بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمَٰنِ الرَّحِيمِ
In the name of Allah, Most Gracious, Most Merciful.

51:1 وَٱلذَّٰرِيَـٰتِ ذَرْوًا
51:1
Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi) :
उन (हवाओं की क़सम) जो (बादलों को) उड़ा कर तितर बितर कर देती हैं

51:2 فَٱلْحَـٰمِلَـٰتِ وِقْرًا
51:2
Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi) :
फिर (पानी का) बोझ उठाती हैं

51:3 فَٱلْجَـٰرِيَـٰتِ يُسْرًا
51:3
Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi) :
फिर आहिस्ता आहिस्ता चलती हैं

51:4 فَٱلْمُقَسِّمَـٰتِ أَمْرًا
51:4
Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi) :
फिर एक ज़रूरी चीज़ (बारिश) को तक़सीम करती हैं

51:5 إِنَّمَا تُوعَدُونَ لَصَادِقٌ
51:5
Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi) :
कि तुम से जो वायदा किया जाता है ज़रूर बिल्कुल सच्चा है

51:6 وَإِنَّ ٱلدِّينَ لَوَٰقِعٌ
51:6
Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi) :
और (आमाल की) जज़ा (सज़ा) ज़रूर होगी

51:7 وَٱلسَّمَآءِ ذَاتِ ٱلْحُبُكِ
51:7
Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi) :
और आसमान की क़सम जिसमें रहते हैं

51:8 إِنَّكُمْ لَفِى قَوْلٍ مُّخْتَلِفٍ
51:8
Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi) :
कि (ऐ अहले मक्का) तुम लोग एक ऐसी मुख्तलिफ़ बेजोड़ बात में पड़े हो

51:9 يُؤْفَكُ عَنْهُ مَنْ أُفِكَ
51:9
Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi) :
कि उससे वही फेरा जाएगा (गुमराह होगा)

51:10 قُتِلَ ٱلْخَرَّٰصُونَ
51:10
Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi) :
जो (ख़ुदा के इल्म में) फेरा जा चुका है अटकल दौड़ाने वाले हलाक हों

51:11 ٱلَّذِينَ هُمْ فِى غَمْرَةٍ سَاهُونَ
51:11
Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi) :
जो ग़फलत में भूले हुए (पड़े) हैं पूछते हैं कि जज़ा का दिन कब होगा

51:12 يَسْـَٔلُونَ أَيَّانَ يَوْمُ ٱلدِّينِ
51:12
Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi) :
उस दिन (होगा)

51:13 يَوْمَ هُمْ عَلَى ٱلنَّارِ يُفْتَنُونَ
51:13
Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi) :
जब इनको (जहन्नुम की) आग में अज़ाब दिया जाएगा

51:14 ذُوقُوا۟ فِتْنَتَكُمْ هَـٰذَا ٱلَّذِى كُنتُم بِهِۦ تَسْتَعْجِلُونَ
51:14
Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi) :
(और उनसे कहा जाएगा) अपने अज़ाब का मज़ा चखो ये वही है जिसकी तुम जल्दी मचाया करते थे

51:15 إِنَّ ٱلْمُتَّقِينَ فِى جَنَّـٰتٍ وَعُيُونٍ
51:15
Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi) :
बेशक परहेज़गार लोग (बेहिश्त के) बाग़ों और चश्मों में (ऐश करते) होगें

51:16 ءَاخِذِينَ مَآ ءَاتَىٰهُمْ رَبُّهُمْ ۚ إِنَّهُمْ كَانُوا۟ قَبْلَ ذَٰلِكَ مُحْسِنِينَ
51:16
Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi) :
जो उनका परवरदिगार उन्हें अता करता है ये (ख़ुश ख़ुश) ले रहे हैं ये लोग इससे पहले (दुनिया में) नेको कार थे

51:17 كَانُوا۟ قَلِيلًا مِّنَ ٱلَّيْلِ مَا يَهْجَعُونَ
51:17
Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi) :
(इबादत की वजह से) रात को बहुत ही कम सोते थे

51:18 وَبِٱلْأَسْحَارِ هُمْ يَسْتَغْفِرُونَ
51:18
Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi) :
और पिछले पहर को अपनी मग़फ़िरत की दुआएं करते थे

51:19 وَفِىٓ أَمْوَٰلِهِمْ حَقٌّ لِّلسَّآئِلِ وَٱلْمَحْرُومِ
51:19
Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi) :
और उनके माल में माँगने वाले और न माँगने वाले (दोनों) का हिस्सा था

51:20 وَفِى ٱلْأَرْضِ ءَايَـٰتٌ لِّلْمُوقِنِينَ
51:20
Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi) :
और यक़ीन करने वालों के लिए ज़मीन में (क़ुदरते ख़ुदा की) बहुत सी निशानियाँ हैं

51:21 وَفِىٓ أَنفُسِكُمْ ۚ أَفَلَا تُبْصِرُونَ
51:21
Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi) :
और ख़ुदा तुम में भी हैं तो क्या तुम देखते नहीं

51:22 وَفِى ٱلسَّمَآءِ رِزْقُكُمْ وَمَا تُوعَدُونَ
51:22
Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi) :
और तुम्हारी रोज़ी और जिस चीज़ का तुमसे वायदा किया जाता है आसमान में है

51:23 فَوَرَبِّ ٱلسَّمَآءِ وَٱلْأَرْضِ إِنَّهُۥ لَحَقٌّ مِّثْلَ مَآ أَنَّكُمْ تَنطِقُونَ
51:23
Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi) :
तो आसमान व ज़मीन के मालिक की क़सम ये (क़ुरान) बिल्कुल ठीक है जिस तरह तुम बातें करते हो

51:24 هَلْ أَتَىٰكَ حَدِيثُ ضَيْفِ إِبْرَٰهِيمَ ٱلْمُكْرَمِينَ
51:24
Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi) :
क्या तुम्हारे पास इबराहीम के मुअज़िज़ मेहमानो (फ़रिश्तों) की भी ख़बर पहुँची है कि जब वह लोग उनके पास आए

51:25 إِذْ دَخَلُوا۟ عَلَيْهِ فَقَالُوا۟ سَلَـٰمًا ۖ قَالَ سَلَـٰمٌ قَوْمٌ مُّنكَرُونَ
51:25
Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi) :
तो कहने लगे (सलामुन अलैकुम) तो इबराहीम ने भी (अलैकुम) सलाम किया (देखा तो) ऐसे लोग जिनसे न जान न पहचान

51:26 فَرَاغَ إِلَىٰٓ أَهْلِهِۦ فَجَآءَ بِعِجْلٍ سَمِينٍ
51:26
Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi) :
फिर अपने घर जाकर जल्दी से (भुना हुआ) एक मोटा ताज़ा बछड़ा ले आए

51:27 فَقَرَّبَهُۥٓ إِلَيْهِمْ قَالَ أَلَا تَأْكُلُونَ
51:27
Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi) :
और उसे उनके आगे रख दिया (फिर) कहने लगे आप लोग तनाउल क्यों नहीं करते

51:28 فَأَوْجَسَ مِنْهُمْ خِيفَةً ۖ قَالُوا۟ لَا تَخَفْ ۖ وَبَشَّرُوهُ بِغُلَـٰمٍ عَلِيمٍ
51:28
Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi) :
(इस पर भी न खाया) तो इबराहीम उनसे जो ही जी में डरे वह लोग बोले आप अन्देशा न करें और उनको एक दानिशमन्द लड़के की ख़ुशख़बरी दी

51:29 فَأَقْبَلَتِ ٱمْرَأَتُهُۥ فِى صَرَّةٍ فَصَكَّتْ وَجْهَهَا وَقَالَتْ عَجُوزٌ عَقِيمٌ
51:29
Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi) :
तो (ये सुनते ही) इबराहीम की बीवी (सारा) चिल्लाती हुई उनके सामने आयीं और अपना मुँह पीट लिया कहने लगीं (ऐ है) एक तो (मैं) बुढ़िया (उस पर) बांझ

51:30 قَالُوا۟ كَذَٰلِكِ قَالَ رَبُّكِ ۖ إِنَّهُۥ هُوَ ٱلْحَكِيمُ ٱلْعَلِيمُ
51:30
Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi) :
लड़का क्यों कर होगा फ़रिश्ते बोले तुम्हारे परवरदिगार ने यूँ ही फरमाया है वह बेशक हिकमत वाला वाक़िफ़कार है

51:31 ۞ قَالَ فَمَا خَطْبُكُمْ أَيُّهَا ٱلْمُرْسَلُونَ
51:31
Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi) :
तब इबराहीम ने पूछा कि (ऐ ख़ुदा के) भेजे हुए फरिश्तों आख़िर तुम्हें क्या मुहिम दर पेश है

51:32 قَالُوٓا۟ إِنَّآ أُرْسِلْنَآ إِلَىٰ قَوْمٍ مُّجْرِمِينَ
51:32
Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi) :
वह बोले हम तो गुनाहगारों (क़ौमे लूत) की तरफ भेजे गए हैं

51:33 لِنُرْسِلَ عَلَيْهِمْ حِجَارَةً مِّن طِينٍ
51:33
Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi) :
ताकि उन पर मिटटी के पथरीले खरन्जे बरसाएँ

51:34 مُّسَوَّمَةً عِندَ رَبِّكَ لِلْمُسْرِفِينَ
51:34
Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi) :
जिन पर हद से बढ़ जाने वालों के लिए तुम्हारे परवरदिगार की तरफ से निशान लगा दिए गए हैं

51:35 فَأَخْرَجْنَا مَن كَانَ فِيهَا مِنَ ٱلْمُؤْمِنِينَ
51:35
Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi) :
ग़रज़ वहाँ जितने लोग मोमिनीन थे उनको हमने निकाल दिया

51:36 فَمَا وَجَدْنَا فِيهَا غَيْرَ بَيْتٍ مِّنَ ٱلْمُسْلِمِينَ
51:36
Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi) :
और वहाँ तो हमने एक के सिवा मुसलमानों का कोई घर पाया भी नहीं

51:37 وَتَرَكْنَا فِيهَآ ءَايَةً لِّلَّذِينَ يَخَافُونَ ٱلْعَذَابَ ٱلْأَلِيمَ
51:37
Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi) :
और जो लोग दर्दनाक अज़ाब से डरते हैं उनके लिए वहाँ (इबरत की) निशानी छोड़ दी और मूसा (के हाल) में भी (निशानी है)

51:38 وَفِى مُوسَىٰٓ إِذْ أَرْسَلْنَـٰهُ إِلَىٰ فِرْعَوْنَ بِسُلْطَـٰنٍ مُّبِينٍ
51:38
Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi) :
जब हमने उनको फिरऔन के पास खुला हुआ मौजिज़ा देकर भेजा

51:39 فَتَوَلَّىٰ بِرُكْنِهِۦ وَقَالَ سَـٰحِرٌ أَوْ مَجْنُونٌ
51:39
Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi) :
तो उसने अपने लशकर के बिरते पर मुँह मोड़ लिया और कहने लगा ये तो (अच्छा ख़ासा) जादूगर या सौदाई है

51:40 فَأَخَذْنَـٰهُ وَجُنُودَهُۥ فَنَبَذْنَـٰهُمْ فِى ٱلْيَمِّ وَهُوَ مُلِيمٌ
51:40
Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi) :
तो हमने उसको और उसके लशकर को ले डाला फिर उन सबको दरिया में पटक दिया

51:41 وَفِى عَادٍ إِذْ أَرْسَلْنَا عَلَيْهِمُ ٱلرِّيحَ ٱلْعَقِيمَ
51:41
Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi) :
और वह तो क़ाबिले मलामत काम करता ही था और आद की क़ौम (के हाल) में भी निशानी है हमने उन पर एक बे बरकत ऑंधी चलायी

51:42 مَا تَذَرُ مِن شَىْءٍ أَتَتْ عَلَيْهِ إِلَّا جَعَلَتْهُ كَٱلرَّمِيمِ
51:42
Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi) :
कि जिस चीज़ पर चलती उसको बोसीदा हडडी की तरह रेज़ा रेज़ा किए बग़ैर न छोड़ती

51:43 وَفِى ثَمُودَ إِذْ قِيلَ لَهُمْ تَمَتَّعُوا۟ حَتَّىٰ حِينٍ
51:43
Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi) :
और समूद (के हाल) में भी (क़ुदरत की निशानी) है जब उससे कहा गया कि एक ख़ास वक्त तक ख़ूब चैन कर लो

51:44 فَعَتَوْا۟ عَنْ أَمْرِ رَبِّهِمْ فَأَخَذَتْهُمُ ٱلصَّـٰعِقَةُ وَهُمْ يَنظُرُونَ
51:44
Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi) :
तो उन्होने अपने परवरदिगार के हुक्म से सरकशी की तो उन्हें एक रोज़ कड़क और बिजली ने ले डाला और देखते ही रह गए

51:45 فَمَا ٱسْتَطَـٰعُوا۟ مِن قِيَامٍ وَمَا كَانُوا۟ مُنتَصِرِينَ
51:45
Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi) :
फिर न वह उठने की ताक़त रखते थे और न बदला ही ले सकते थे

51:46 وَقَوْمَ نُوحٍ مِّن قَبْلُ ۖ إِنَّهُمْ كَانُوا۟ قَوْمًا فَـٰسِقِينَ
51:46
Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi) :
और (उनसे) पहले (हम) नूह की क़ौम को (हलाक कर चुके थे) बेशक वह बदकार लोग थे

51:47 وَٱلسَّمَآءَ بَنَيْنَـٰهَا بِأَيْي۟دٍ وَإِنَّا لَمُوسِعُونَ
51:47
Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi) :
और हमने आसमानों को अपने बल बूते से बनाया और बेशक हममें सब क़ुदरत है

51:48 وَٱلْأَرْضَ فَرَشْنَـٰهَا فَنِعْمَ ٱلْمَـٰهِدُونَ
51:48
Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi) :
और ज़मीन को भी हम ही ने बिछाया तो हम कैसे अच्छे बिछाने वाले हैं

51:49 وَمِن كُلِّ شَىْءٍ خَلَقْنَا زَوْجَيْنِ لَعَلَّكُمْ تَذَكَّرُونَ
51:49
Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi) :
और हम ही ने हर चीज़ की दो दो क़िस्में बनायीं ताकि तुम लोग नसीहत हासिल करो

51:50 فَفِرُّوٓا۟ إِلَى ٱللَّهِ ۖ إِنِّى لَكُم مِّنْهُ نَذِيرٌ مُّبِينٌ
51:50
Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi) :
तो ख़ुदा ही की तरफ़ भागो मैं तुमको यक़ीनन उसकी तरफ से खुल्लम खुल्ला डराने वाला हूँ

51:51 وَلَا تَجْعَلُوا۟ مَعَ ٱللَّهِ إِلَـٰهًا ءَاخَرَ ۖ إِنِّى لَكُم مِّنْهُ نَذِيرٌ مُّبِينٌ
51:51
Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi) :
और ख़ुदा के साथ दूसरा माबूद न बनाओ मैं तुमको यक़ीनन उसकी तरफ से खुल्लम खुल्ला डराने वाला हूँ

51:52 كَذَٰلِكَ مَآ أَتَى ٱلَّذِينَ مِن قَبْلِهِم مِّن رَّسُولٍ إِلَّا قَالُوا۟ سَاحِرٌ أَوْ مَجْنُونٌ
51:52
Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi) :
इसी तरह उनसे पहले लोगों के पास जो पैग़म्बर आता तो वह उसको जादूगर कहते या सिड़ी दीवाना (बताते)

51:53 أَتَوَاصَوْا۟ بِهِۦ ۚ بَلْ هُمْ قَوْمٌ طَاغُونَ
51:53
Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi) :
ये लोग एक दूसरे को ऐसी बात की वसीयत करते आते हैं (नहीं) बल्कि ये लोग हैं ही सरकश

51:54 فَتَوَلَّ عَنْهُمْ فَمَآ أَنتَ بِمَلُومٍ
51:54
Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi) :
तो (ऐ रसूल) तुम इनसे मुँह फेर लो तुम पर तो कुछ इल्ज़ाम नहीं है

51:55 وَذَكِّرْ فَإِنَّ ٱلذِّكْرَىٰ تَنفَعُ ٱلْمُؤْمِنِينَ
51:55
Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi) :
और नसीहत किए जाओ क्योंकि नसीहत मोमिनीन को फायदा देती है

51:56 وَمَا خَلَقْتُ ٱلْجِنَّ وَٱلْإِنسَ إِلَّا لِيَعْبُدُونِ
51:56
Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi) :
और मैने जिनों और आदमियों को इसी ग़रज़ से पैदा किया कि वह मेरी इबादत करें

51:57 مَآ أُرِيدُ مِنْهُم مِّن رِّزْقٍ وَمَآ أُرِيدُ أَن يُطْعِمُونِ
51:57
Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi) :
न तो मैं उनसे रोज़ी का तालिब हूँ और न ये चाहता हूँ कि मुझे खाना खिलाएँ

51:58 إِنَّ ٱللَّهَ هُوَ ٱلرَّزَّاقُ ذُو ٱلْقُوَّةِ ٱلْمَتِينُ
51:58
Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi) :
ख़ुदा ख़ुद बड़ा रोज़ी देने वाला ज़ोरावर (और) ज़बरदस्त है

51:59 فَإِنَّ لِلَّذِينَ ظَلَمُوا۟ ذَنُوبًا مِّثْلَ ذَنُوبِ أَصْحَـٰبِهِمْ فَلَا يَسْتَعْجِلُونِ
51:59
Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi) :
तो (इन) ज़ालिमों के वास्ते भी अज़ाब का कुछ हिस्सा है जिस तरह उनके साथियों के लिए हिस्सा था तो इनको हम से जल्दी न करनी चाहिए

51:60 فَوَيْلٌ لِّلَّذِينَ كَفَرُوا۟ مِن يَوْمِهِمُ ٱلَّذِى يُوعَدُونَ
51:60
Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi) :
तो जिस दिन का इन काफ़िरों से वायदा किया जाता है इससे इनके लिए ख़राबी है